गणेशजी द्रविड़ न्याय दर्शन और ज्योतिष के प्रकांड विद्वान हैं। उन्होंने ही मुहूर्त निकाला है।
भारतीय परंपरा के आधार पर काशी में एक शास्त्रार्थ हो जाय। विद्वानों को आकर अपना मत रखना चाहिये। अब भी भारत में शास्त्रों के ज्ञाता हैं। नई पीढ़ी भी अपनी प्राचीन परंपरा का आनंद लेगी।
अभी तक प्राणप्रतिष्ठा के पक्ष में जो भी कहा गया है वह शास्त्रों का उद्धरण दिया गया , स्वयं गणेशजी द्रविड़ ने शास्त्रों का उद्धरण दिया है।
जबकि विरुद्ध में किसी शास्त्र के श्लोक को नहीं रखा गया है। इससे निष्कर्ष निकलता है कि विरोध में जो हैं उनकी मानसिकता दूषित है।।