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पूज्य पिताश्री स्व. हरिश्चंद्र श्रीवास्तव 'हरीश जी' ने अपना पूरा जीवन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, भारतीय जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी के बैनर तले जनसेवा को समर्पित किया। उनके 76 वर्षों के सामाजिक जीवन का प्रत्येक दिन जनता-जनार्दन के लिए चिंतन में बीता।
हमें भली-भांति स्मरण है कि 18 जनवरी 2015, जिस दिन उन्होंने परलोक गमन किया था। उस दौरान हम लोग प्रतिदिन रात 10 बजे से 2 तक सेवा बस्तियों में घर-घर जाकर कंबल पहुंचाते थे। थोड़े से कंबल बचे हुए थे, जिन पर पूज्य पिताश्री की नजर पड़ गई और 17 जनवरी की रात्रि लगभग 9 बजे, हमारे घर लौटते ही उन्होंने बचे हुए कंबल बांटने जाने का निर्देश दिया। जीवन की अंतिम रात्रि भी वह लोगों को ठंड से बचाने की चिंता कर रहे थे।
इसीलिए उनकी पुण्यतिथि पर हमनें काशी में सेवा के सबसे बड़े केंद्र "अपना घर आश्रम" जाने का निर्णय लिया। हमनें उनसे जुड़े लगभग सभी वरिष्ठ कार्यकर्ताओं को वहां बुलाने का प्रयास किया जिसमें सफलता भी मिली। सभी वरिष्ठ कार्यकर्ताओं ने उनसे जुड़े प्रसंग सुनाए। वहां उपस्थित युवा कार्यकर्ताओं को निश्चित रूप से अच्छा मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।
हम सभी खाली हाथ आते हैं और खाली हाथ ही जाना है। यहां जो मिला है यही छोड़ जाना है। अतः जीवन सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि समाज के लिए जीना चाहिए। यही पिताजी के जीवन वृत्त का संदेश था और यही हमारा भी आप सभी से निवेदन है।
पूज्य पिताश्री को शत-शत नमन।

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