अब समझ आया कि..
राजा दशरथ ने राघव वियोग में अपने प्राण क्यों तजे..
मां वैदेही पुष्प वाटिका में क्यों सुध बुध खो बैठी...
हनुमत क्यों चरणों में पड़े तो अश्रु बिंदु से ही चरण पखार दिए..
इतना अद्भुत, अलौकिक स्वरूप..
लगता है जैसे नेत्रज्योति पाने का प्रयोजन सिद्ध हो गया..