2 yıl - çevirmek

आज पाषाण है *कल प्राण* होंगे
कोटि हिंदुजनो के *प्रिय मान* होंगे
भारत के सब *पूरे काम* होंगे
जब जन्मभूमि में *विराजित* श्रीराम होंगे

कृष्णशिला पर *अवधेश की मूर्ति* आकार लेगी
सहस्त्रों *सनातनियों की भावना* साकार होगी
*5 शताब्दियों* तक संघर्ष करने वाले
*श्रीचरणो* में बैठे कर रहे अभिमान होंगे
*जब जन्मभूमि में विराजित श्रीराम होंगे*

म्लेच्छ यवनों के लिए *अग्निबाण होगा*
जब रामलला विराजमान का *धनुष सन्धान* होगा
*मारुतिनंदन की गदा* से *हरते प्राण* होंगे
जब *जन्मभूमि में विराजित श्रीराम* होंगे।

‼️ *जय जय श्रीराम* ‼️

image