गत 10 वर्षों में जिसको जो रास्ता सूझा, उस प्रकार से सबने संसद में अपना-अपना कार्य किया।
लेकिन मैं इतना जरूर कहूंगा कि जिनका आदतन हुड़दंग करने का स्वभाव बन गया है, जो आदतन लोकतांत्रिक मूल्यों का चीरहरण करते हैं, ऐसे सभी मान्य सांसद आज जब आखिरी सत्र में मिल रहे हैं तो ये जरूर आत्मनिरीक्षण करेंगे कि 10 साल में उन्होंने जो किया, वो उनके संसदीय क्षेत्र में भी किसी को याद नहीं होगा कि उन्होंने इतना हुड़दंग मचाया।