एक शेरनी गर्भवती थी, गर्भ पूरा हो चुका था शिकारियों से बचने के लिए छलाँग लगाकर एक टीले से दूसरे टीले पर तो पहुँच गई लेकिन बच्चा नीचे गिर गया
नीचे भेड़ों की एक कतार गुजरती थी वह बच्चा उस झुंड में पहुँच गया; था तो शेर का बच्चा लेकिन फिर भेड़ों को दया आ गई और उन्होने उसे अपने झुंड में मिला लिया
भेड़ों ने उसे पाला पोसा और शेर जवान हो गया
शेर का बच्चा था तो शरीर से सिंह ही हुआ लेकिन भेड़ों के साथ रहकर वह खुद को भेड़ मानकर ही जीने लगा
एक दिन उसके झुंड पर एक शेर ने धावा बोला उसको देखकर भेड़ें भागने लगीं, शेर की नजर भेड़ों के बीच चलते शेर पर पड़ी दोनों एक दूसरे को आश्चर्य से देखते रहे सारी भेंड़े भाग गईं शेर अकेला रह गया
दूसरे शेर ने इस शेर को पकड़ लिया अब यह शेर होकर भी रोने लगा मिमियाया, गिड़गिड़ाया कि छोड़ दो मुझे , मुझे जाने दो मेरे सब संगी साथी जा रहे हैं...मेरे परिवार से मुझे अलग न करो
दूसरे शेर ने फटकारा- अरे मूर्ख !
ये तेरे साथी नहीं हैं तेरा दिमाग फिर गया है,तू पागल हो गया है परन्तु वह नहीं माना वह तो स्वयं को भेंड़ मानकर भेड़चाल में चलता था।बड़ा शेर उसे घसीटता हुआ नदी के किनारे ले गया ,दोनों ने नदी में झाँका बूढ़ा शेर बोला नदी के पानी में अपना चेहरा देख और पहचान
उसने देखा तो पाया कि जिससे जीवन की भीख माँग रहा है वह तो उसके ही जैसा है ; उसे बोध हुआ कि मैं तो मैं भेड़ नहीं हूँ और मैं तो इस शेर से भी ज्यादा बलशाली और तगड़ा हूँ क्योंकि मैं जवान हूँ उसका स्वाभिमान जागा आत्मबल से भऱकर उसने भीषण गर्जना की ! सिंहनाद था वह ऐसी गर्जना उठी उसके भीतर से कि पहाड़ काँप गए बूढ़ाशेर भी काँप गया उसने कहा–अरे इतने जोर से दहाड़ता है
युवा शेर बोला–उसने जन्म से कभी दहाड़ा ही नहीं आपकी बड़ी कृपा हुई जो मुझे जगा दिया और इसी दहाड़ के साथ उसका जीवन रूपांतरित हो गया.....!
यही बात मनुष्य के संबंध में भी हैं, अगर मनुष्य जान ले कि जो कृष्ण और श्रीराम में हैं वह उसमें भी है तो फिर हमारे भीतर से भी वही गर्जना फूटेगी
अहं ब्रह्मास्मि, मैं ही ब्रह्मा हूँ
गूँज उठेंगे पहाड़, काँप जाएंगे लोग, धधक जाय जो जुल्म देखकर हिन्दुत्व की वो आग हूँ मैं
मैं दुनिया का केन्द्र बिन्दु हूँ ; हाँ मैं हिन्दू हूँ...!!!
जय श्री राम 🙏🌹