गुर्जराधिपति क्षत्रिय(राजपूत) सम्राट राजा भोज परमार
कहाँ राजा भोज कहाँ गंगू तेली :
राजा भोज मालवा रीजन के राजा थे, जिन्होंने 11वीं सदी में मालवा पर राज किया था. वह एक वीर और ताकतवर राजा थे और उन्होंने भोपाल की खोज की थी. उनके ही नाम पर भोपाल का नाम भी रखा गया था. पहले भोपाल का नाम भोजपाल हुआ करता था. जो राजा भोज के ही नाम पर था. बाद में इसी नाम को बदल कर भोपाल कर दिया गया है. राजा भोज मालवा के राजा हुआ करते थे और उस समय वहां की राजधानी धार हुआ करती थी, जहां पर राजा भोज ने कई युद्ध लड़े और जीत भी हासिल की. जिनमे से उनके दो युद्ध थे कल्चुरी नरेश गांगेय यानी “गंगू” से और चालुक्य नरेश तैलंग यानी ” तेली” से. जिसमे राजा भोज ने इन दोनो राजाओं को बहुत ही बुरी तरह से हरा दिया था. जिसके बाद से ये कहावत काफी प्रसिद्ध हो गई .
(कहाँ राजा भोज कहाँ गंगू तेली )
जो राजा भोज के बल और प्रतिष्ठा को दर्शाती है और दूसरी तरफ गंगू और तेली की हार और कमजोरी की व्याख्या करती है.
#राजपूत_सम्राट_राजा_भोज का परिचय : परमारवंशीय राजपूत राजाओं ने मालवा के एक नगर धार को अपनी राजधानी बनाकर 8वीं शताब्दी से लेकर 14वीं शताब्दी के पूर्वार्ध तक राज्य किया था। उनके ही वंश में हुए परमार वंश के सबसे महान अधिपति महाराजा भोज ने धार में 1000 ईसवीं से 1055 ईसवीं तक शासन किया।
क्षत्रिय सम्राट राजा भोज से संबंधित 1010 से 1055 ई. तक के कई ताम्रपत्र, शिलालेख और मूर्तिलेख प्राप्त होते हैं। भोज के साम्राज्य के अंतर्गत मालवा, कोंकण, खानदेश, भिलसा, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, चित्तौड़ एवं गोदावरी घाटी का कुछ भाग शामिल था। उन्होंने उज्जैन की जगह अपनी नई राजधानी धार को बनाया। राजा भोज को उनके कार्यों के कारण उन्हें 'नवसाहसाक' अर्थात् 'नव विक्रमादित्य' भी कहा जाता था। राजा भोज इतिहास प्रसिद्ध मुंजराज के भतीजे व सिंधुराज के पुत्र थे। उनकी पत्नी का नाम लीलावती था।
#ग्रंथ_रचना : राजा भोज खुद एक विद्वान होने के साथ-साथ काव्यशास्त्र और व्याकरण के बड़े जानकार थे और उन्होंने बहुत सारी किताबें लिखी थीं। मान्यता अनुसार भोज ने 64 प्रकार की सिद्धियां प्राप्त की थीं तथा उन्होंने सभी विषयों पर 84 ग्रंथ लिखे जिसमें धर्म, ज्योतिष, आयुर्वेद, व्याकरण, वास्तुशिल्प, विज्ञान, कला, नाट्यशास्त्र, संगीत, योगशास्त्र, दर्शन, राजनीतिशास्त्र आदि प्रमुख हैं।
उन्होंने ‘समरांगण सूत्रधार’, ‘सरस्वती कंठाभरण’, ‘सिद्वांत संग्रह’, ‘राजकार्तड’, ‘योग्यसूत्रवृत्ति’, ‘विद्या विनोद’, ‘युक्ति कल्पतरु’, ‘चारु चर्चा’, ‘आदित्य प्रताप सिद्धांत’, ‘आयुर्वेद सर्वस्व श्रृंगार प्रकाश’, ‘प्राकृत व्याकरण’, ‘कूर्मशतक’, ‘श्रृंगार मंजरी’, ‘भोजचम्पू’, ‘कृत्यकल्पतरु’, ‘तत्वप्रकाश’, ‘शब्दानुशासन’, ‘राज्मृडाड’ आदि ग्रंथों की रचना की।
आईन-ए-अकबरी में प्राप्त उल्लेखों के अनुसार भोज की राजसभा में 500 विद्वान थे। इन विद्वानों में नौ (नौरत्न) का नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। महाराजा भोज ने अपने ग्रंथों में विमान बनाने की विधि का विस्तृत वर्णन किया है। इसी तरह उन्होंने नाव व बड़े जहाज बनाने की विधि का विस्तारपूर्वक उल्लेख किया है। इसके अतिरिक्त उन्होंने रोबोट तकनीक पर भी काम किया था।
इतिहास समाज को एक नई दिशा और ताकत देता है!😊

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