असल किसान नहीं, ये पूँजीपति हैं जो किसानों के नाम पर राजनीतिक दलों की दलाली करते हैं।
देश में 92% जोत लघु व सीमांत कृषकों की हैं, जिन्हें किसान राजनीति से कोई वास्ता नहीं। आंदोलन कर रहे स्वार्थी तत्व, छोटे किसानों का प्रतिनिधित्व नहीं करते।
खेती किसानी की आड़ में ये लोग टैक्स भी नहीं भरते और कृषक सब्सिडी का पूरा लाभ भी उठाते हैं जो छोटे किसानों के लिए होनी चाहिए।
किसान संगठनों के नाम पर चंदाबाज़ी व राजनीतिक दलों की दलाली अलग से।
इन पूँजीपति कथित किसानों को आमजन की समस्याओं से भी कोई सरोकार नहीं।
ये नितांत रूप से मोदी विरोधी की राजनीति का अंग हैं।