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कोई भी साधक अपने इष्ट के निरंतर नाम जप से यहीं अनुभूति का आभास करता है

१- शरीर में हल्कापन और मन में उत्साह होता है ।

२- शरीर में से एक विशेष प्रकार की सुगन्ध आने लगती है ।

३- त्वचा पर चिकनाई और कोमलता का अंश बढ़ जाता है ।

४- तामसिक आहार-विहार से घृणा बढ़ जाती है और सात्त्विक दिशा में मन लगने लगता है ।

५- स्वार्थ का कम और परमार्थ का अधिक ध्यान रहता है ।

६- नेत्रों में तेज झलकने लगता है ।

७- किसी व्यक्ति या कार्य के विषय में वह जरा भी विचार करता है, तो उसके सम्बन्ध में बहुत-सी ऐसी बातें स्वयमेव प्रतिभासित होती हैं, जो परीक्षा करने पर ठीक निकलती हैं।

८- दूसरों के मन के भाव जान लेने में देर नहीं लगती ।

९ - भविष्य में घटित होने वाली बातों का पूर्वाभास मिलने लगता है ।

१० - शाप या आशीर्वाद सफल होने लगते हैं। अपनी गुप्त शक्तियों से वह दूसरों का बहुत कुछ लाभ या बुरा कर सकता है।

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