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गूजर जाति की धाय भीला गूजरी के बारे में जानकारी देता एक शिलालेख, जो कैलाशपुरी में एक जलस्त्रोत पर लगा है। भीला गूजरी मेवाड़ के महाराणा अमरसिंह द्वितीय की पुत्री चंद्र कुंवरी की धाय थीं।

मेवाड़ में गूजर जाति की और भी धाय और दासियों का उल्लेख मिलता है, परन्तु वीरविनोद ग्रंथ में भूलवश माता पन्नाधाय को खींची राजपूतानी बता दिया गया। वास्तव में मेवाड़ में कोई भी राजपूतानी धाय का काम नहीं करती थीं। धाय के पुत्र को मेवाड़ के शासक धायभाई कहते थे और धायभाइयों का उल्लेख भी मेवाड़ के कई शिलालेखों में है।

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