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'करुणा, सेवा और तपस्या की त्रिवेणी'
करुणा, सेवा और तपस्या से परिपूर्ण आचार्य जी का जीवन भगवान महावीर के आदर्शों का प्रतीक रहा, उनका जीवन जैन धर्म की मूल भावना का सबसे बड़ा उदाहरण रहा।
पढ़ें आदरणीय प्रधानमंत्री श्री Narendra Modi जी का यह लेख...

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