भारतीय सिनेमा में अभिनेता ममूटी की तासीर भी कमाल की है। किरदारों से प्रयोग करने का जो जीवट वह इस उम्र में भी दिखा रहे हैं, वह प्रशंसनीय है। कल रात उनकी नई मलयालम फ़िल्म 'भ्रमयुगम्' देखी। हॉरर फ़िल्मों में भूत प्रेत दिखाने से आगे जो कुछ विश्व सिनेमा में हो रहा है, उससे इक्कीस है ये फ़िल्म। पूरी फ़िल्म श्वेत-श्याम है और कलियुग के आगे उस युग की कहानी है जहां सबको किसी न किसी बात का भ्रम है। और, ये भ्रमयुग ऐसा है जिसमें एक बार जो आ गया, तो फ़िर जैसा वह सोचता है और करता है, वैसा ही बन जाता है..! फ़िल्म जो दिखती है और कहती है, उससे कहीं ज़्यादा मर्म इसका इसके अनकहे में हैं। मौका मिले तो देखिए ज़रूर। मूल भाषा में अंग्रेज़ी सबटाइटल्स के साथ रिलीज़ हुई है। जै जै..!!
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