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#dhruvrathee ठीक बोल रहा है कि सरकार विपक्षी नेताओं को जेल में डाल रही है.

उसकी बात सही है. कांग्रेस अलग थी. उसने विरोधियों को नहीं, अपने ही सहयोगी दलों के नेताओं को चुन चुन कर जेल में डाला.

2013 में लालू यादव को पहली बार सीबीआई कोर्ट ने सजा सुनाई, जेल भेजा और उनको जीवन भर के लिए राजनीति से बाहर कर दिया. राहुल गांधी की गारंटी है. सीबीआई तब भी प्रधानमंत्री कार्यालय के तहत ही काम करती थी. प्रधानमंत्री बेशक मनमोहन सिंह थे. प्रधानमंत्री वाजपेयी तक लालू के खिलाफ ये नहीं कर पाए थे.

मनमोहन सरकार ने अपने सबसे बडे सहयोगी डीएमके के नेता करुणानिधि की बेटी कनिमोझी और अपने मंत्री ए राजा को गलत केस में तिहाड जेल में डाला. केस फर्जी निकला.

कांग्रेस ने इसी दौर में अपने एक और सगयोगी मंत्री माननीय शिबू सोरेन को जेल में डाला. साधारण ट्रेन में बिठाकर रास्ते भर तमाशा बनाकर दिल्ली से धनबाद ले गए थे.

याद है न?

बहनजी के खिलाफ ताज कोरिडोर और पार्क के केस खोले गए. भट्टा पारसौल में बहनजी की सरकार के खिलाफ आंदोलन करने खुद राहुल गांधी गए. मुलायम सिंह के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का केस इसी दौरान खुला.

बीजेपी के किसी नेता को यूपीए दौर में जेल में नहीं डाला गया. उनको कोई दिक्कत नहीं दी गई.

जानते है क्यों?

कांग्रेस को जेएनयू की एक प्रोफेसर ने समझा दिया था कि आपका जनाधार ये सहयोगी दल ले गए हैं. ये दल खत्म हुए तो आपका पुराना सुनहरा दौर वापस आ जाएगा.

बस यहीं खेल हो गया. वो जनता इन दलों से छिटकी, पर बीजेपी के पास चली गई.

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