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हिंदुत्वा के प्रेणता
#वीर_सावरकर जिनकी पुस्तक "द इंडियन वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस" को पढ़कर तमाम क्रांतिकारियों ने अंग्रेजो के खिलाफ आवाज उठाई ।उनकी यह पुस्तक कान्तिकारियो के लिए बाइबल की तरह थी
इन्होंने ने ही हिन्दुराष्ट्र की राजनीतिक विचारधारा विकसित की
आज इन महान "अमर वीर सारवरकर" की पुण्य तिथि पर हम सभी नमन करते हैं। हम ऋणी हैं ऐसे क्रांतिवीर का
इनका नाम सुनकर ही अंग्रेज डर जाते थे और इसीलिए अंग्रेजो ने इन्हें काला पानी भेजकर कारागार में रख दिया क्योकि अगर इनकी एक पुस्तक मात्र क्रांतिकारियों को इतना उत्तेजित कर सकती है तो इन्हें जेल से बाहर कैसे रख सकते थे।
अब आप इस क्रोनोलाजी को समझाइये जो भी क्रांतिकारी शहीद हुए उन्हें हमेशा छुप कर रहना पड़ता था क्योंकि अंग्रेजो के हाथों आते ही या तो उन्हें जेल दाल दिया जाता या उन फांसी दे दी जाती थी
सुभाष चंद्र बोस क्रांतिवीर भेष बदल दूसरे देश की यात्रा तक कर लेते थे और अंग्रेजो को पता तक नही चलता था
क्या भेष बदलकर विदेश भाग जान कायरता है .? नही ना.!
चंद्रशेखर जैसे क्रांतिकारी अंग्रेजो की नजर से हमेशा छुपकर रहते थे बिल्कुल अंडरग्राउंड और छुपकर रहना, भेस बदलकर रजन आदि यह स्वतंत्रता सेनानियों की रणनीति का हिस्सा रहा है
ठीक उसी तरह जेल से बाहर निकलकर क्रांति करने के लिए अंग्रेजो से माफी पत्र लिखने उस समय का एकमात्र विकल्प था। और यह काम वीर सावरकर की रणनीति का एक हिस्सा था जिस पर आज की लंपट/बामपंथी अक्सर सवाल उठाते हैं
ये वही लंपट है जिनकी माओ ने मुगलो को जजिया कर देने के बजाय अपने नाड़े खोल दिया थे।

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