2 Jahre - übersetzen

फेसबुकिया यूनिवर्स का एक और चुटियापा तैयार....
आज इस फोटो के पीछे पैर निचोड़ पड़े हैं...
इसको मुमताज़ की फोटो बता रिये हैं...
कह रिये हैं इत्ती भुंडी के लिए खामखाह ताज़महल बनाया....
रे भाई एक काम कर ले तू अपणी घराड़ी खातिर बिटोरा ही बनवा दे...... कती सेनोरिटा की फूफी वरगी है....
पहली बात भाई शाहजहाँ के ज़माने में कैमरा न था और ये फोटो कैमरा से खींची हुईं है कोई पेंटिंग नहीं..... और पेंटिंग होती तो मोटी बात बूझो उसमें रंग होते..... कैमरा कलर वाला आने से पहले दुनियाँ में रंग थे...
ये जो खड़ी दीख री है यो थी भाई भोपाल के नवाब जहांगीर मोहम्मद खान की लुगाई.... इसका नाम था शाह ज़हाँन बेग़म..... नाम शाह जहान बेग़म था.... शाहजहाँ की बेग़म न थी.... शाहजहाँ इसके पैदा होने से 200 साल पहले मर चुका था...
ये लेखिका थी और 1857 के बाद के ब्रिटिश भारत पर इनका लिखा काफ़ी प्रामाणिक दस्तावेज माना जाता है...
वैसे इसी की एक फोटो कुछ साल पहले लक्ष्मीबाई बता कर भी घुमा चुके हैं फेसबूकिया योद्धा....... और तब खूबसूरती की तारीफ़ के पुल बांध... कमेंट में नमन नमन खेल....
दौनो फोटो देख लो...... समझ लो.... और हो सके तो इतिहास की एंटोनिआ बेंका एक करने से पहले थोड़ा सा सोच लिया करो....!
अजय सिंह

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