Birendra K Jha जी की पोस्ट :
पुरातत्व: भगवान कृष्ण की आयु और रेडियो डेटिंग:
Archaeology: Age of Bhagwan Krishna And Radio Dating:
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हमारे भारत के पंडितजी कमाल की प्राचीन परम्परा अपने साथ लेकर आज भी चल रहे हैं। समय बदल गया, पर वे नहीं बदले। वे अत्यंत प्राचीन काल से किसी पूजा संकल्प के पहले इस मन्त्र का पाठ करते हैं :
“ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः श्रीमद् भगवतो महापुरूषस्य,विष्णुराज्ञया प्रवर्तमानस्य अद्य ब्रह्मणोऽह्नि द्वितीये परार्धे श्रीश्वेत वाराहकल्पे वैवस्वत मन्वन्तरे अष्टाविंशति तमे कलियुगे कलि प्रथमचरणे भारतवर्षे भरतखण्डे जम्बूद्वीपे आर्यावर्तैक देशान्तर्गते..."
.... और इसके साथ जिस दिन पूजा हो रही है कलियुग वर्ष कितने बीत गए , इसका उल्लेख अनिवार्यतः करते हैं।
यह प्राचीन मन्त्र तबका बना है, जब न तो इस्लाम का जन्म हुआ था और न ही यूरोप की ईसापूर्व या ईस्वी संका ही प्रचलन था।
यह मन्त्र निःसंदेह महाभारत काल का है। जिसमें सम्वत बताने की अत्यंत प्राचीन परम्परा है। २२ मार्च २०२३ से कलियुग के ५१२५ वर्ष ठीक बीत रहे हैं। इसी कली सम्वत का प्रयोग भारत के हिन्दू पंडित करते हैं।
यह संकल्प न पढ़ी जाय तो पूजा निष्फल मानी जाती है। २२ मार्च २०२३ में कलियुग के ५१२५, वर्ष बीतने का अर्थ यह भी है की, भगवान कृष्ण ने उसी दिन पृथ्वी को छोड़ कर बैकुंठ की महायात्रा की थी। गणना करने पर यह समय सटीक ३१०२ ईस्वी पूर्व मिलता है। अब असली मुद्दे की बात करता हूँ।
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समुद्र में डूबे "कोरल रीफ" पुरातत्व जगत के लिए कितने महत्वपूर्ण और उपयोगी हैं, इसका ज्ञान भारत के पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग को नहीं है। जब एजेंसी ही नहीं जानती है, तब साधारण पुरातात्विक क्या जानेंगे !
मेरे द्वारका की खोज में ये कोरल रीफ बड़े काम के चीज हुए। मैंने टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ़ फंडामेंटल रिसर्च में कोरल रीफ की कार्बन डेटिंग निकलवाई थी। मुझे दो जानकारी मिली। ओखा के कोरल कोई ६०००० वर्ष के थे तो वर्तमान डूबे हुए द्वारका के कोरल ३१०० ईस्वी पूर्व के मिल रहे थे।
कोरल ने सटीक भगवान कृष्ण के बैकुंठ गमन की यात्रा तिथि निश्चित कर दी। यही द्वारका के डूबने की तिथि थी। कोरल रीफ की कार्बन डेटिंग, भारत के भ्रमित इतिहास को न केवल उलट देती है अपितु पूरातात्विकों के हाथ में समुद्र में डूबे पुरातात्विक सम्पदा की कार्बन डेटिंग जानने का अचूक अस्त्र भी है।
ज्ञात रहे जैसे ही द्वारका समुद्र में डूबी, ये कोरल ठीक उसी दिन से बन रहे हैं। ये कोरल आज भी ज़िंदा हैं।
सेटेलाइट के सेंसर चिंत्रण में जो हरा रंग आप देख रहे हैं , वे समुद्र में डूबे कोरल हैं। कोरल के चारों ओर सफ़ेद लाल रंग प्रकाश पेटिका जो आप देख रहे हैं वहाँ पत्थर के बने विशाल नगर निर्माण हैं।