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बिजनौर के सीताराम जी के पास 8 बीघा जमीन है लेकिन इतना पैसा नहीं था कि दूसरा भैसा ख़रीद सके। इसलिए खुद ही दूसरे भैसे के स्थान पर लग गए।

ये तस्वीर 2017 में कमल कुमार ने खींची थी। उस वक्त बड़ी चर्चा हुई थी। हो भी क्यों न, यही तो मौजूदा वक्त के किसानों की हकीकत है।

कहने का अर्थ यह है कि वादों और दावों से किसान के जीवन में बेहतरी नहीं आएगी। उनके लिए पूरी ईमानदारी से काम करना होगा। तब सीताराम जैसे लोगों के जीवन में आर्थिक खुशहाली आएगी।

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