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कभी-कभी तो शक होता है कि क्या ये वही चयनकर्ता हैं जिन्होंने कभी केएस भरत,मुकेश कुमार, प्रसिद्ध कृष्णा,जयदेव उनादकट जैसे लीजेन्ड खिलाङियों का चयन अपनी पारखी नजरों से भारतीय टीम में किया था? शक इसलिए होता है कि उन लीजेन्ड खिलाङियों को चुनने वाली पारखी नजर आखिर आकाशदीप,ध्रुव जुरेल, सरफराज खान जैसे खिलाङियों पर कैसे पङ गयी? उन अतिविशिष्ट प्रतिभाशाली खिलाङियो के साथ जुरेल,दीप,सरफराज जैसे खिलाङियों का चयन करना लगता है अनुपात बराबर करने के उद्देश्य से किया गया था। ऐसा लगता है कि उन खिलाङियों के बीच प्रतिभाओं का बैलेंस बनाने के लिए ही इन खिलाङियों का चयन किया गया था।
जब इंग्लैंड के खिलाफ पांच टेस्ट मैचों के लिए भारतीय टीम दो चरणों में घोषित की गयी तब भारतीय टीम में चेतेश्वर पुजारा,आंजिक्य रहाणे और हनुमा विहारी,उमेश यादव,भुवनेश्वर कुमार जैसे अनुभवी और टेस्ट स्पेशलिस्ट बल्लेबाजों और गेंदबाजों को भारतीय टीम में नही चुना गया तब लोगों ने सवाल उठाए थे कि आखिर बिना अनुभवी खिलाङियों के यह टीम इंग्लैंड जैसी मजबूत टीम से कैसे सिरीज जीतेगी? यह सवाल लोग पूछ ही रहे थे कि कोच साहब ने भी सबसे पहले केएस भरत, मुकेश कुमार जैसे लीजेन्ड खिलाङियों पर ही दांव खेला लेकिन जब इन लीजेन्ड खिलाङियों ने अपनी क्षमताओं से कोच और कप्तान साहब को अवगत कराया तो उसके बाद मजबूर होकर आकाशदीप,ध्रुव जुरेल और सरफराज खान की तरफ देखना पङा था।
अजीत अगरकर ने जिन खिलाङियों का चयन किया था उनमें से मुकेश कुमार,प्रसिद्ध कृष्णा,केएस भरत अपने बेहद साधारण प्रदर्शन से लोगों के दिल से उतर गये वहीं ध्रुव जुरेल,आकाशदीप और सरफराज खान अपने प्रदर्शन से लोगों के दिल में उतर गये। आज चारों ओर जिन खिलाङियों की चर्चाएं हो रही हैं और लोग तारीफें कर रहे हैं उन खिलाङियों का चयन करने वाले अजीत अगरकर साहब को तो लोग इस तरह भूल गये हैं जैसे शादी कराने वाले अगुवा को लोग शादी होने के बाद भूल जाते हैं।

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