1613 ई. में जहांगीर द्वारा समूचे मुगल साम्राज्य की फौज को मेवाड़ के महाराणा अमरसिंह के विरुद्ध भेजने के बारे में खुद जहांगीर अपनी आत्मकथा तुजुक-ए-जहांगीरी में लिखता है कि :-
"मिर्ज़ा अज़ीज कोका की कमान में एक फौज पहले से मेवाड़ में तैनात थी। फिर मैंने ख़ुर्रम को इतनी बड़ी फौज देकर विदा किया जिसकी गिनती कर पाना भी मुश्किल है। मैंने राजपूताने की रियासतों बूंदी, जोधपुर, किशनगढ़ और आमेर की फौजों को मेवाड़ भेज दिया। इनके अलावा आगरा, गुजरात, पंजाब, बुंदेलखंड और मालवा की फौजों को भी मेवाड़ विदा किया। दक्कन में जो फौज मैंने परवेज़ की कमान में भेजी थी, उसको भी मैंने मेवाड़ के राणा अमरसिंह के खिलाफ मेवाड़ भेज दिया।"
अब आप अनुमान लगाइए कि महाराणा अमरसिंह कितने महान शासक रहे होंगे, जिन्हें झुकाने के लिए सारे मुगल साम्राज्य की फौज भी कम पड़ गई।