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यह है हल्दी घाटी की मिट्टी. मिट्टी का रंग पीला है हल्दी के जैसा और इस लिये यह कहलाई हल्दी घाटी।
#history
खरसन गाँव में लक्ष्मी नारायण मंदिर में पत्थर के शीला लेख पर इतिहास दर्ज किया गया जिसमें स्पष्ट शब्दों में हल्दी घाटी का युद्ध, अकबर के सेनापति मान सिंह की वापसी और महाराणा प्रताप की विजय का लिखित प्रमाण है। पत्थर की विशेषता यह होती है कि कार्बन डेटिंग से आयु पता चल जाती है और यह माना गया कि यह शिला लेख सन् 1576 का ही है हल्दीघाटी युद्ध के पश्चात।
ज़ाहिर सी बात थी अगर मुग़ल विजेता होते तो न जनता महाराणा की जीत का जश्न मना पाती, और कम से कम शिला लेख पर इस तरह इतिहास तो न ही लिखा जाता कि मुग़लों की हार हुई।
पिछले दस वर्षों में मिले इन विविध साक्ष्यों के आधार पर सिद्ध हो चुका है कि हल्दी घाटी का युद्ध राजपूतों ने जीता था। हाँ अकबर की चाटुकारिता में लिखी आईने अकबरी में अबुल फैजल ने इसका उल्टा लिखा। आज़ाद भारत में भी उसी आइने अकबरी में लिखी चाटुकारिता को ज्यों का त्यों इतिहास का नाम दे दिया गया।
SUMAN

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