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चोर नरेंद्र मोदी।

अडानी मोदी का कोयला घोटाला सरल भाषा में समझिए:

1. नरेंद्र मोदी सरकार ने कोयले की एक फर्जी कमी पैदा की देश में और स्थिति यहां तक पहुंचा दी की बिजली पैदा करने वाली कंपनियों पर संकट आ गया।

2. इसके बाद नरेंद्र मोदी सरकार ने एक कानून बनाया जिसके अनुसार आयात निर्यात का डाटा निकाल कर पब्लिश करना कानूनन अपराध बता दिया गया। यहां यह बताना जरूरी है कि इससे पहले कोई भी व्यक्ति इंटरनेट से आयात निर्यात का डाटा निकल सकता था मूल्य समेत।

3. इतना करने के बाद सरकारों (केंद्र एवं राज्य) ने अदानी को खूब सारा कोयला आपूर्ति करने के ऑर्डर दे डालें। इतना ही नहीं जो कोयला लोकल मान लीजिए ₹1 का मिलता था उसे अडानी से ₹6 में या ₹7 में खरीदने के लिए भी ओके कर दिया।

4. फिर तय हुआ कि अडानी जिस भाव पर कोयला खरीदेगा उस भाव पर कुछ मार्जन देकर सरकार उसे खरीद लेगी।

5. अगर सीधा-सीधा कहा जाए तो अडानी को अपनी ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया की कोयला कंपनियों से सीधा भारत को कोयला आपूर्ति देनी थी।

6. लेकिन अडानी ने ऐसा नहीं किया, उसने अपने मित्रों द्वारा जिनमें से एक चीन का निवासी है तीन फर्जी कंपनियां खुलवाईं।

7. इन तीन फर्जी कंपनियों ने अडानी की ही कोयला कंपनियों ( अडानी इंडोनेशिया और आस्ट्रेलिया ) से कोयला खरीदा मान लीजिए ₹100 का और उसे भारत वाली अडानी कंपनी को बेच दिया ₹200 का ‌ ।

8. अब अडानी जी ने भारत सरकार को अपनी लागत कीमत बताई ₹200 और उसके ऊपर मार्जिन लिया। इसका मतलब जो मार्जिन उसे सिर्फ ₹100 के ऊपर मिलना था उसने फर्जी कंपनियों के ज़रिए ₹100 एक्स्ट्रा लिया और उसके ऊपर मार्जिन भी लिया।

9. अब अडानी ने जिन फर्जी कंपनियों से ₹200 का कोयला खरीदा था उन कंपनियों ने उस एक्स्ट्रा 100 को वापस भारत वाली अडानी ग्रुप के शेयर खरीदने में लगा दिया।

10. इससे दो काम हुए:
a. एक तो अडानी के शेयरों की कीमत जो ₹500 थी वह 5000 पहुंच गई, FIIs के नाम पर बाहर से काला धन अंदर लाया गया।
b. दूसरा फिर उसने यह बढ़े हुए शेयर सरकारी बैंकों को गिरवी रखकर लाखों करोड़ का उधार और ले लिया।

इसमें किसी को शक नहीं होना चाहिए बिना नरेंद्र मोदी और उसकी सरकार के मिली भगत के काम नहीं हो सकता।

गौरतलब है कि 7 साल पहले ओवर इन्वॉइसिंग के लिए DRI ने अडानी का मामला उठाया था । लेकिन, वित्त मंत्रालय जिसकी मुखिया निर्मला सीतारमण है और जो नरेंद्र मोदी को रिपोर्ट करती हैं उसने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि हम इस मामले को आगे नहीं बढ़ाता चाहते, हम ओवर इन्वॉइसिंग का मामला नहीं देखना चाहते।

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