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#बिरयानी की ईजाद हिंदुस्तान में हुई, लेकिन पुलाव उससे बहुत पहले वजूद में आ चुका था,
... ये पुलाव असल में तुर्की में ईजाद हुआ "पिलाफ़" या "पलाउ" है, जिसका जिक्र इतिहास में दसवीं शताब्दी से मिलता है,
गोश्त की यखनी में चावल और मेवे वगैरह डालकर जो पकवान मध्य एशिया में बना करता था, उसे पिलाफ़ कहा जाता था, और यही व्यंजन तुर्की ईरानी लोगों के साथ भारत भी पहुँचा, .... शाहजहां का दौर आते आते गोश्त के स्टॉक में चावल पकाने से अलग एक विधि भी ईजाद हो गई जिसमें गोश्त के कोरमे और चावलों की तह लगाकर पुलाव बनाया जाने लगा, जिसको बिरयानी नाम दिया गया
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.... लेकिन बिरयानी से अलग बीसियों तरह के पुलाव अब भी मध्य एशिया में बनाये जाते हैं, तस्वीर में उज़्बेकी पुलाव दिख रहा है, जिसमे काली किशमिश और गाजर के लम्बे पीस डाले जाते हैं... यही पुलाव कुछ मसालों और मेवों की घटाबढ़ी के साथ अफगानिस्तान में भी बनता है, और वहां का राष्ट्रीय व्यंजन है
अरब में बनने वाला पुलाव "मंदी" आजकल बहुत मशहूर हो रहा है जो असल में यमनी डिश है....
शक्ल से ये सभी पुलाव बहुत ज़ायकेदार महसूस होते हैं.... ये बहस क्या है कि लखनऊ की बिरयानी अच्छी है या दिल्ली की ? ज़रा अपने घरों से निकलकर दुनिया भी घूमें और पुलाव बिरयानी को उन जगहों पर भी खाकर देखा जाए जहां इन खानों की पैदाइश हुई थी, .... यक़ीनन ज़ायके के मामले में वो तमाम पुलाव भी बेजोड़ होंगे

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