CAG के मुताबिक़ शराब नीति में ₹ 2000 करोड़ का चार स्तर का घोटाला हुआ !

₹ 941 करोड़ - जानबूझकर परमिशन की गड़बड़ी।

₹ 890 करोड़ - रिटेंडरिंग ना करने के कारण।

₹ 144 करोड़ - अनियमितताओं के कारण।

₹ 27 करोड़ - सिक्योरिटी डिपाजिट में गड़बड़ी के कारण।

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