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मोदी सरकार में "इंडिया" का पतन हो रहा है और "भारत" का उदय।

सोनिया सरकार में प्रधानमंत्री के मीडिया सलाहकार संजय बारू ने अपनी पुस्तक एवं एक इंटरव्यू में कहा कि मोदी सरकार ने प्रतिष्ठित अंग्रेजी विद्यालयों ("मेट्रोपोलिटन संस्थानों, जैसे कि सेंट स्टीफेंस कॉलेज", या फिर ऑक्सफ़ोर्ड हारवर्ड) में पढ़े, "औपनिवेशिक और सामंती बैकग्राउंड" वाले अभिजात वर्ग का विनाश कर दिया है।

बारू आगे कहते है कि पुराने अभिजात वर्ग ने राज्य के सभी संस्थानों, नौकरशाही, पुलिस, न्यायपालिका और मीडिया पे कब्जा (captured) कर लिया था। नाममात्र के भूमि सुधारों, कर संरचना और लाइसेंस परमिट नियंत्रण राज के द्वारा इस अभिजात वर्ग का एकाधिकार और सार्वजनिक व्यय पे उनकी पकड़ को (दूसरे शब्दों में, सरकारी खज़ाना इस वर्ग के ऊपर उड़ा दिया जाता था) संरक्षित रखा था, और सब्सिडी के द्वारा मध्यम वर्ग को खुश रखा जाता था।

वह बतलाते है कि पूर्व की सरकारों में, यहाँ तक कि वाजपेयी सरकार में भी प्रधानमंत्री कार्यालय इन प्रतिष्ठित अंग्रेजी विद्यालयों के पढ़ाकुओं से भरा होता था। लेकिन मोदी सरकार में अब छोटे शहरो एवं ग्रामीण पृष्ठभूमि ("प्रोविंशियल बैकग्राउंड", स्थानीय भाषा एवं विद्यालयों में पढ़े) वाले नौकरशाहों एवं राजनीतिज्ञों की भरमार है। प्रतिष्ठित अंग्रेजी विद्यालय वाले लोगो को नीति आयोग भेज दिया गया है।

बारू स्वीकार करते है कि मोदी सरकार में "इंडिया" का पतन हो रहा है और "भारत" का उदय।

नवंबर 2019 में इंडियन एक्सप्रेस में तवलीन सिंह का लेख छपा था। इसमें तवलीन रूदन कर रही है कि प्रधानमंत्री मोदी के द्वितीय कार्यकाल में "नए", ध्यान दीजिये, नए अभिजात वर्ग ने अब भारत के मार्गदर्शन का पूरा प्रभार ले लिया है। इसलिए यह समझना आवश्यक है कि यह नया अभिजात वर्ग कौन है और इसके मूल्य क्या हैं?

तवलीन लिखती है कि पुराने अभिजात वर्ग के विपरीत, जो आम तौर पर "उच्च वर्ग और उच्च जाति", ध्यान दीजिये, उच्च वर्ग और उच्च जाति, के थे, नया अभिजात वर्ग पूरी तरह से निम्न मूल और निम्न जाति का है।

आप ठीक पढ़ रहे है। तवलीन लिख रही है नया अभिजात वर्ग पूरी तरह से निम्न मूल और निम्न जाति का है।

तवलीन आगे लिखती है कि यह नया अभिजात वर्ग मोदी के प्रति श्रद्धा, नए मूल्यों से लगाव और उन लोगों से गहरी नफरत करता है जो केवल अपने विशेषाधिकार के कारण लाभ उठा रहे थे।

फिर नवंबर 2020 में अरुण शौरी ने एक इंटरव्यू में कहा कि आरएसएस के "भूखे-नंगे" लोग अब प्रधानमंत्री मोदी के समर्थक है। उनके इस समर्थन से क्रोधित होकर शौरी इन "भूखे-नंगे" लोगो के विरूद्ध इंटरव्यू में आग उगल रहे थे।

मैं कई वर्षो से लिखता आ रहा हूँ कि प्रधानमंत्री मोदी ने नोटबंदी, GST, आधार, सब्सिडी का सीधे लाभार्थियों के खाते में ट्रांसफर, लोन वसूली, अनुच्छेद 370 के समापन, कृषि सुधारो के द्वारा उच्च वर्ग और उच्च जाति के अभिजात वर्ग का रचनात्मक विनाश का दिया है; साथ ही, शौचालय, घर, कुकिंग गैस, घर में पाइप से जल की आपूर्ति, इत्यादि के द्वारा "निम्न मूल और निम्न जाति" एवं "भूखे-नंगे" वर्ग के नए अभिजात वर्ग का उदय कर दिया है।

प्रधानमंत्री मोदी भारत में रचनात्मक विनाश (creative destruction) कर रहे है. वही रचनात्मक विनाश, जिसके बिना हम नए समाज, भ्रष्टाचार मुक्त समाज, एकसमान समाज की स्थापना नहीं कर सकते।

तभी भ्रष्ट परिवादवादी पार्टिया, खानदान के बूते पे पत्रकारिता करने वाले लोग, परिवार के बूते पे लाखो करोड़ो का गबन कर जाने वाले दलाल प्रधानमंत्री मोदी के विरोध में खड़े है।

इस नए उभरते हुए भारत का स्वागत कीजिये, उत्सव मनाइये।

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