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सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च।
दधाना हस्तप‌द्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥

जगज्जननी जगदम्बा के चतुर्थ स्वरूप माँ कूष्माण्डा की उपासना-आराधना से दीर्घायु, यश, बल और आरोग्यता का आशीर्वाद मिलता है। देवी माँ से सबके लिए सुख-शांति और समृद्धि की प्रार्थना है।

जय माँ कूष्माण्डा!

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