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जय सियाराम सुमंगल सुप्रभात प्रणाम बन्धु मित्रों। राम राम जी।
श्रीरामचरितमानस नित्य पाठ पोस्ट ३३६, बालकाण्ड दोहा ६८/ १-४, नारदजी हिमाचल को उपाय बता रहे हैं।
तदपि एक मैं कहउॅं उपाई।
होइ करै जौं दैउ सहाई।।
जस बरु मैं बरनेउॅं तुम्ह पाहीं।
मिलिहि उमहि तस संसय नाहीं।।
जे जे बर के दोष बखाने।
ते सब सिव पहिं मैं अनुमाने।।
जौं बिबाहु संकर सन होई।।
दोषउ गुन सम कह सबु कोई।।
भावार्थ:- नारदजी ने हिमाचल से कहा कि एक उपाय मैं बताता हूॅं। यदि दैव सहायता करे तो वह सिद्ध हो सकता है।
उमा को वर तो नि:सन्देह वैसा ही मिलेगा जैसा मैंने कहा है। परन्तु मैंने वर के जो जो दोष बतलाये हैं, मेरे अनुमान से वे सभी शिवजी में हैं।यदि शिवजी के साथ विवाह हो जाय तो दोषों को भी सब लोग गुणों के समान ही कहेंगे।
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