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जय सियाराम सुमंगल सुप्रभात प्रणाम बन्धु मित्रों। राम राम जी।
श्रीरामचरितमानस नित्य पाठ पोस्ट ३७१, बालकाण्ड दोहा ८०, पार्वती जी का सप्तर्षि से कहा।
महादेव अवगुण भवन विष्णु सकल गुण धाम।
जेहि कर मनु रम जाहि सन तेहि तेहि सन काम।।८०।।
भावार्थ:- पार्वती जी सप्तर्षि से कह रही है कि, माना कि महादेव जी अवगुणों के भवन हैं और विष्णु समस्त सद्गुणों के धाम है; पर जिसका मन जिस में रम गया है, उसको तो उसी से काम है, अन्य से नहीं।
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