1 ذ - ترجم

अभी कुछ दिन से मैं कुमाऊं संभाग के भ्रमण पर हूं। सुबह प्रमुख समाचार पत्रों को पढ़ने के बाद मन बहुत क्षुब्ध हो जा रहा है। आज भी समाचार पत्रों के पृष्ठ के पृष्ठ दुष्कर्मों के समाचारों से रंगे पड़े हैं। हम एक विकृत समाज तो नहीं हो रहे हैं यह चिंता का विषय है। समाज में निरंतर बढ़ती जा रही असहिष्णुता, घृणा, निराशा इस तरीके के कुण्ठाजन्य घोर अपराधिक बीमारियों का कारण बन गये हैं। मोबाइल संस्कृति भी इसके एक संभावित कारणों में हो सकती है। केवल आज एक समाचार ने मेरे मन को गुदगुदाया जूडो कराटे की ट्रेनिंग लेकर लौट रही छात्रा ने एक मजनू की लात-घूंसों से पिटाई कर दी। कानून डंक विहीन हो गया है या हमारा मनोरोग इतना बढ़ गया है कि हमें कानून का भय ही नहीं रह गया है! समाज में जिम्मेदार पदों पर बैठे हुए लोग और जिन्हें बुजुर्ग कहा जा सकता है वह इस तरीके के अत्यधिक घृणित कर्मों में लिप्त पाये जा रहे हैं।
#uttarakhand

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