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ब्राम्हणों में श्रेष्ठ पुलस्त ऋषि की नातिन थी सूर्पनखा सेनापति
विद्युतजिह्वा से विवाहित थी पर कर्म से तो राक्षसी ही थी,
माता सीता को कष्ट पहुंचाने का प्रयास कर रही थी परिणाम
स्वरूप लक्ष्मण भईया से नाक कान कटवा के भागी लंका क्या
मिल गया उसके चक्कर में महादेव के परम भक्त तीनों काल के
ज्ञाता रावण तक को मरना पड़ा। बेचारे कुंभकरण को तो नींद
से जगा के मरने को भेजा दिया, मेघनंद, अक्षयकुमार, जैसे
बालकों को मरना पड़ा।
अब महासती पतिव्रता माता जानकी के पति भगवान श्री
राम पर कुदृष्टि डालेगी तो यही होगा न
ब्राम्हण की बेटी है ब्राम्हण की बेटी है माय फुट ब्राम्हण की
बेटी। अपने पति से छल करके सतियों के पतियों पर कुदृष्टि
रखने वाली सिर्फ सूपर्नखा होती है
मजे की बात तो ये है सूपर्णखा त्रेतायुग की हो या कलयुग की
शक्ल सेम ही होती सभी सूपर्णखाओ की, और मायावी भी
होती है, त्रेतायुग की सूपर्णखा रूप बदलती थी कलयुग की
सूपर्णखा जाति बदलती है।

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