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💞💕विश्व टेलीविजन दिवस विशेष:🥰🥰🔥💯✊

#भारत में टेलीविजन की आहट वैसे तो 1950 में ही हो गई थी जब #चेन्नई के इलेक्ट्रिकल #इंजीनियरिंग के स्टूडेंट ने कैथोड रेज टेलीविजन सेट डिस्प्ले के लिए रखा था मगर #घरों में इसकी पहुंच 1959 में पहले ट्रांसमिशन के बाद ही हो पाई।

1965 में डेली ट्रांसमिशन चालू हुआ और #दिल्ली के अलावा #मुम्बई और #अमृतसर से भी #प्रसारण होने लगा।

अस्सी के दशक में टीवी #धारावाहिक बनने शुरू हुए और अभिजात्य घरों से निकलकर टीवी अब कस्बों और गांव की ओर बढ़ चला।

#गांव गली में टेलीविजन सेट्स पहुंचने का श्रेय श्री #रामानन्द सागर जी को जाता है जिन्होंने #प्रभु श्री #राम की कथा को एक मनमोहक अंदाज में जन जन तक पहुंचाया। #रामायण धारावाहिक के प्रसारण के समय सड़कों पर अघोषित कर्फ्यू लग जाता था।

मुझे खूब याद है कि गॉंवों में रामायण का एपिसोड शुरू होने से पहले बिजली आपूर्ति बाधित होने की दशा में टीवी सेट चालू रखने के लिए लैड एसिड बैटरियों का इंतजाम किया जाता था या फिर ट्रैक्टर से बिजली पैदा करके धारावाहिक देखा जाता था। धारावाहिक शुरू होने से पहले टीवी सेट के सामने #अगरबत्ती जलाई जाती थी और खत्म होने के बाद देखने आए #मुहल्ले भर के दर्शक गणों को प्रसाद वितरित किया जाता था।

और #कलाकारों का सम्मान तो बस पूछिये मत। साक्षात भगवान श्री राम और माता सीता की तरह पूजा जाता था उनको।

इसी के बाद आरम्भ हुए #महाभारत ने भी लोगों को अपनी ओर आकृष्ट किया। हम लोग, बुनियाद, वागले की दुनिया, माल गुड़ी डेज... ता ना ना ता ना ना, जंगल बुक... चढ्ढी पहन के फूल खिला है, रात को सोना है तो जाग जाइए...

पहले जमाने में टीवी मोटे हुआ करते थे CRT के कारण और बीबियाँ पतली। विकास की आंधी ने टीवी पतले कर दिए और बीबियाँ मोटी...

फोटो में है: RCA-630 TS बोले तो सभी मॉडर्न टेलीविजन सेट्स के पड़दादा का पड़दादा...

#विश्व_टेलीविजन_दिवस
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जय हिंद 😍

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