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आज सुष्मिता सेन की यह तस्वीर उनके किसी इंटरव्यू के कथन के साथ दिखी...
" अपने अपमान का उत्तर मैं उस व्यक्ति से दूरी बनाकर देती हूँ! मैं प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं करती, न ही कोई झगड़ा या सवाल जवाब! मैं बेकार के ड्रामे से दूर रहकर, अपनी उपस्थिति ही उसकी जिंदगी से हटा देती हूँ "
यह पढ़कर मुझे सुष्मिता बिल्कुल अपनी सी लगी....जैसी बातें मैं सोचती हूँ उनका जवाब भी बिल्कुल वैसा ही था।
सुष्मिता सेन मुझे अपनी समकालीन अभिनेत्रियों ही नहीं अपितु आजकल की भी बहुत सी अभिनेत्रियों से बेहतर लगती हैं। इसलिए नहीं कि वे बेहद खूबसूरत हैं या वो ब्रह्मांड सुंदरी रह चुकी हैं! क्योंकि अगर बात सुंदरता की होगी तो लगभग उनके साथ ही आईं ऐश्वर्या भी सुंदरता की हर कसौटी पर खरी उतरती हैं। ऐश्वर्या और सुष्मिता दोनों की अलग अलग फैन फॉलोइंग हैं...और कुछ मेरे जैसे प्रशंसक हैं, जिन्हें दोनों की ही सुंदरता की तासीर बेहद अलग और सौम्यता से भरी लगती हैं।
इसलिए सौंदर्य के पैमाने के साथ भी और उससे कहीं परे भी सुष्मिता सेन मुझे बहुत पसंद हैं। उनकी बातें, उनका व्यक्तित्व बेहद ज़हीन सरल और कुशलता से परिपूर्ण लगता हैं। अपनी बात स्पष्टता से कहने और उसे दृढ़ रूप से रखने में उनका कोई सानी नहीं!
वो जब साझा करती हैं कि मिस यूनिवर्स प्रतियोगिता के दौरान उनका विनिंग गाउन से लेकर बाकी पहने गए उनके सारे कपड़े, किसी लोकल दर्जी से सिलवाए गए थे। उनके हाथ मे पहने काले रंग के खूबसूरत दस्ताने किसी फुटपाथ से खरीदे काले मोजों को काट कर बनाए गए थे....तो ऐसा लगता है कि वो हम में से ही कोई हैं, जिसने मिडिल क्लास होते हुए भी आसमान छूने और सितारों की तरह चमकने का सपना देखा, और उसे पूरा भी किया।
उन्होंने अपनी 25 साल की उम्र में बिना विवाह किए एक बच्ची को गोद लेने का बेहद सशक्त कदम उठाया! कहीं सराहना हुई तो कहीं मजाक बनाया गया। एक दशक बाद फिर उन्होंने एक और बेटी को गोद लिया, तो समझ आ गया कि सुष्मिता जो करती हैं, वह दृढ़ता से करती हैं। बच्चों की बेहतर परवरिश और संस्कार उनके आचरण में दिखते हैं। और जब वो अपने इंटरव्यू के दौरान बच्चों की छोटी छोटी बातें साझा करतीं हैं, तो लगता है कि वह कितनी बेहतरीन माँ हैं।
उन्हें 2023 में जब उन्हें हार्ट अटैक आया तो उन्होंने इसके बारे में भी खुलकर बात की। वो अपनी निजी और पेशेवर चुनौतियों के बारे में बात करने से कभी कतराती नहीं!
उन्होंने बताया कि यह घटना "होनी ही थी! फिट होने का मतलब यह नहीं है कि आपको हिचकी नहीं आएगी, चाहे वह आनुवांशिक हो या अन्यथा। " मेरे मामले में, यह आनुवांशिक था, मुझे लगता है कि यह होना ही था। अच्छा यह हुआ कि मैं बच गई...और अब जीवन को और उसके महत्व को और बेहतर तरीके से समझने लगी हूँ।
वो कहती हैं कि, अटैक के दौरान जब मुझे मेरे बच्चों के लिए डर लगा, तब मुझे एहसास हुआ कि एक माँ होना क्या होता है? जब मौत का डर नहीं बल्कि बच्चों के अकेले हो जाने का डर ज्यादा बड़ा होता हैं।
उनका नाम ललित मोदी से जुड़ा। उनके ऊपर तमाम मिम्स बनें, किसी ने उन्हें गोल्ड डिगर कहा तो किसी ने ललित मोदी के लुक को देखकर उनका मजाक बनाया। उन्होंने कुछ चुप्पी से तो कुछ स्पष्टता से अपने हर कदम को सही साबित किया।
उनको देखकर, सुनकर, पढ़कर ऐसा लगता है कि वो वाकई उससे कहीं ज्यादा डिजर्व करती हैं, जितना उन्हें प्राप्त हुआ हैं।
ऐसे ही रहना हमेशा... सुष्मिता सेन❤️

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