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🚩श्री रामचरित मानस पाठ 🚩-रामायण संदेश
(दिवस -४५) गतांक से आगे।

बड़ा ही भावुक दृश्य है। माता सती माया के वशीभूत हो गई हैं अब उन्हें लगता है कि वह पिता के घर चली जाएं जबकि स्वयं भगवान भोलेनाथ उन्हें समझाने का प्रयास करते हैं कि यज्ञ के लिए उनके पास निमंत्रण नहीं आया है इसलिए वहां जाना उचित नहीं है।

ब्रह्मसभाँ हम सन दुखु माना। तेहि तें अजहुँ करहिं अपमाना॥
जौं बिनु बोलें जाहु भवानी। रहइ न सीलु सनेहु न कानी॥

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