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कभी-कभी तस्वीरें बोलती नहीं, चुप रहकर भी सब कह जाती हैं…
यह बच्ची सिर्फ एक चेहरा नहीं, हमारे समाज का आईना है - जहां ग़रीबी विरासत बन चुकी है और मुफलिसी पीढ़ियों तक पहुँच रही है।

सरकारें फ्री राशन बाँटकर अपनी “उपलब्धि” गिनाती हैं, पर असली जीत तब होगी जब किसी बच्चे की थाली में खाना दान नहीं, उसका हक़ बनकर पहुँचे।

काश, इस देश में दर्द को भी “आधार” से जोड़ दिया जाए - ताकि जिसने एक बार ग़रीबी झेली हो, उसके आने वाली पीढ़ियों को वो दोबारा न देखनी पड़े।
क्योंकि इंसान तब तक आज़ाद नहीं, जब तक उसकी ज़िंदगी रोटी की जद्दोजहद में कैद है।

अभी और कितने वर्ष लगेंगे भारत को ग़रीबी से निजात दिलाने में?

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