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तस्वीर में दिख रही यह प्यारी बच्ची, सिसिलिया, मिजोरम के एक छोटे से गाँव की है। जहाँ बिजली भी मुश्किल से पहुँचती है। उसके पिता गरीब किसान हैं। इस छोटी सी जान के दिल में छेद था, और हालत बहुत गंभीर थी। इलाज का खर्च इतना था कि परिवार कभी सोच भी नहीं सकता था।
कोलकाता के आर एन टैगोर अस्पताल में बच्ची को लाया गया। इलाज शुरू हुआ, लेकिन खर्च 13 लाख के पार चला गया। दान से कुछ पैसे इकट्ठा हुए, पर लाखों रुपये कम पड़ रहे थे। परिवार के पास सब कुछ खत्म हो चुका था।
तभी डॉ. मृणालेंदु दास (Dr. Mrinalendu Das) सामने आए। एक जाने-माने कार्डियक सर्जन, जिनके लिए यह सिर्फ एक और ऑपरेशन हो सकता था। लेकिन उन्होंने इंसानियत को चुना।
जब उन्होंने परिवार की बेबसी देखी, तो डॉ. दास और अस्पताल प्रशासन ने एक अविश्वसनीय फैसला लिया—उन्होंने पूरे 7,24,892 रुपये का बिल माफ़ कर दिया! जी हाँ, सात लाख से भी ज़्यादा का बिल!
कल्पना कीजिए उस माँ-बाप की खुशी का, जिनके लिए उनके बच्चे की जान दुनिया की सबसे कीमती चीज़ थी, और वह उन्हें दान में मिल गई। आज सिसिलिया स्वस्थ है और अपने घर लौट चुकी है।
डॉ. दास जैसे लोग साबित करते हैं कि इस दुनिया में इंसानियत अभी भी ज़िंदा है। पैसा सब कुछ नहीं होता।
आईये, इस फ़रिश्ते जैसे डॉक्टर और अस्पताल के इस महान कदम के लिए उन्हें सलाम करें। एक लाइक और शेयर तो बनता है, ताकि यह कहानी ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुँचे और दूसरों को भी प्रेरित करे।
इंसानियत के नाम एक ❤️ ज़रूर कमेंट करें।

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