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यह तस्वीर सिर्फ एक महिला की नहीं, बल्कि एक मां की ताकत की कहानी है। परीक्षा से पहले मां बनना और फिर भी अपने कर्तव्य से पीछे न हटना — यही असली जज़्बा है। हालात चाहे जैसे भी हों, हौसले अगर मजबूत हों तो रास्ते खुद बन जाते हैं।
यह सिर्फ एक उपलब्धि नहीं, बल्कि समाज के लिए एक संदेश है कि मां बनना कमजोरी नहीं, बल्कि ताकत है। जिम्मेदारियों के बीच भी सपनों को जिंदा रखा जा सकता है।
ऐसी तस्वीरें प्रेरणा बनती हैं, और बताती हैं कि सच्ची बधाई शोर में नहीं, सम्मान में होती है।

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