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राजस्थान के बाड़मेर निवासी सवाईराम ने पारिवारिक संकटों के बीच महज 10 महीनों की तैयारी में चार सरकारी नौकरियों में चयन पाकर मिसाल पेश की है। पिता की दोनों किडनियां फेल होने के कारण उनकी पढ़ाई दो साल तक रुकी रही, जिसके बाद मां भंवरी देवी ने पिता को अपनी किडनी दान कर उनकी जान बचाई।

सवाईराम ने घर पर बिना किसी कोचिंग के रोजाना 12-14 घंटे पढ़ाई की और जेल प्रहरी (240वीं रैंक), कॉन्स्टेबल, पटवारी (115वीं रैंक) और ग्राम विकास अधिकारी (56वीं रैंक) की परीक्षाओं में सफलता हासिल की। आर्थिक तंगी और जिम्मेदारियों के कारण उन्होंने डॉक्टर बनने का सपना छोड़कर साइंस के बजाय आर्ट्स विषय चुना था। अब उनकी इस कामयाबी से पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है।

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