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संघर्ष जब ज़िद बन जाए और ज़िद को पिता का भरोसा मिल जाए—तब इतिहास बनता है। 🥰🙌🏼
10 साल।
लगातार कोशिशें, असफलताएँ, ताने और थकान…
लेकिन हार नहीं।
इसी जज़्बे के साथ अमिता प्रजापति ने आखिरकार CA बनने का सपना पूरा किया।
रिज़ल्ट आया—और जैसे ही उन्होंने अपने पिता को खबर सुनाई, वो पल शब्दों से परे था।
दोनों एक-दूसरे से लिपटकर रो पड़े—ये आँसू खुशी के थे, त्याग के थे, और सालों की तपस्या के थे।
अमिता के पिता चाय बेचकर परिवार चलाते हैं।
ज़िंदगी ने आसान रास्ते नहीं दिए,
लेकिन एक चीज़ कभी नहीं छोड़ी—बेटी पर भरोसा।
लोग कहते रहे—“सामान्य छात्रा ये कठिन परीक्षा नहीं निकाल पाएगी।”
मगर पिता का विश्वास अमिता की सबसे बड़ी ताक़त बना।
अमिता खुद लिखती हैं—
जब आत्मविश्वास डगमगाता,
पिता का एक वाक्य उन्हें फिर खड़ा कर देता—
“तू कर सकती है।”
बार-बार असफल होने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी।
पढ़ाई जारी रखी, खुद से लड़ीं, और सपने को हकीकत बना दिया।
यह कहानी सिर्फ़ CA बनने की नहीं है—
यह कहानी है एक चाय बेचने वाले पिता के बड़े सपनों की,
और एक बेटी की मेहनत की, जिसने साबित कर दिया कि
हालात नहीं, हौसले तय करते हैं कि इंसान कहाँ तक पहुँचेगा।
ऐसी कहानियाँ याद दिलाती हैं—
सफलता अमीरी से नहीं, हिम्मत और विश्वास से जन्म लेती है। 🤗

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