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डॉ. शिप्रा धर श्रीवास्तव, वाराणसी के फड़िया क्षेत्र की जानी-मानी स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं, जिनके पास 25 वर्षों से अधिक का अनुभव है। साल 2014 से उन्होंने एक अनोखी और प्रेरणादायक पहल शुरू की। उनके नर्सिंग होम में यदि किसी परिवार में बेटी का जन्म होता है, तो वह डिलीवरी का कोई भी शुल्क नहीं लेतीं—चाहे डिलीवरी नॉर्मल हो या सीज़ेरियन।
इतना ही नहीं, फीस लेने के बजाय वह परिवार और स्टाफ को मिठाई बाँटकर बेटी के जन्म को एक उत्सव में बदल देती हैं। यह सोच उन्हें तब आई जब उन्होंने देखा कि कई जगह बेटियों के जन्म पर खुशी के बजाय मायूसी दिखाई देती है। इस पहल का सुझाव उनके पति डॉ. मनोज श्रीवास्तव ने दिया था। आज दोनों मिलकर अब तक 500 से अधिक बेटियों की मुफ्त डिलीवरी करवा चुके हैं।
डॉ. शिप्रा का योगदान सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है। वे ज़रूरतमंद बच्चों के लिए फूड बैंक चलाती हैं, विधवा महिलाओं को त्योहारों पर कपड़े और ज़रूरी सामान देती हैं, और 50 से अधिक बेटियों की निःशुल्क प्राथमिक शिक्षा की जिम्मेदारी भी निभा रही हैं।
ग्रामीण इलाकों में जाकर वह लड़कियों की सेहत, पोषण और समानता को लेकर जागरूकता अभियान भी चलाती हैं। गरीब परिवारों के लिए दवाइयों की व्यवस्था करना भी उनके सेवा कार्यों का हिस्सा है।
साल 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनसे मुलाकात कर इस पहल की सराहना की थी और कहा था कि ऐसे प्रयास ही समाज की सोच को बदलते हैं।
डॉ. शिप्रा धर श्रीवास्तव का यह कदम न केवल परिवारों का आर्थिक बोझ कम करता है, बल्कि समाज को यह संदेश भी देता है कि बेटियाँ बोझ नहीं, बल्कि वरदान हैं।
🙏 सलाम है ऐसी महिला को, जो हर बेटी के जन्म को खुशी और सम्मान से मनाती हैं।
🌹 आइए, हम भी इस सोच को आगे बढ़ाएँ और हर बेटी का स्वागत मुस्कान और मिठाई के साथ करें।

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