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मीडिया चुप क्यों है? 💔
जब शाहरुख़ ख़ान को नेशनल अवॉर्ड में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का सम्मान मिला, तो हर तरफ़ से बधाइयों की बौछार हो गई।
लेकिन उसी सम्मान के हक़दार विक्रांत मैसी की उपलब्धि पर बड़े मीडिया घराने खामोश क्यों नज़र आए?
क्या दोनों को एक ही सम्मान नहीं मिला?
तो फिर एक को आसमान पर बैठा देना और दूसरे की उपलब्धि को लगभग नज़रअंदाज़ कर देना—क्या यह दोहरा मापदंड नहीं है?
सच्ची कला का सम्मान तभी होता है, जब हर कलाकार को बराबरी का मान मिले।
विक्रांत मैसी भी उतने ही योग्य और हक़दार हैं, जितना कोई भी बड़ा नाम।
सम्मान सबको समान रूप से मिलना चाहिए—चाहे नाम बड़ा हो या छोटा।

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