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कड़ाके की ठंड और शीतलहर ने एटा में बुजुर्गों और गंभीर रोगियों के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सांस लेने में गंभीर परेशानी के चलते दो बुजुर्गों और एक टीबी मरीज की मौत हो गई। तीनों को हालत बिगड़ने पर मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में लाया गया था, लेकिन इलाज शुरू होने से पहले ही जान नहीं बचाई जा सकी।
डॉक्टरों के मुताबिक ठंड के मौसम में दमा, सीओपीडी, ब्रोंकाइटिस और टीबी जैसे रोगों से जूझ रहे मरीजों में जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। ठंडी हवा फेफड़ों पर सीधा असर डालती है, जिससे सांस की नली सिकुड़ जाती है और सांस लेने में दिक्कत बढ़ती है। ओपीडी में भी सांस संबंधी मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, खासकर बुजुर्गों में।
ठंड के मौसम में बुजुर्ग और सांस रोगी सुबह-शाम बाहर निकलने से बचें, गर्म कपड़े पहनें, दवाइयों में लापरवाही न करें और सांस लेने में जरा सी भी परेशानी हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। ठंड में सावधानी ही जान बचा सकती है।
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