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🚩 राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) 🚩
राष्ट्र प्रथम – सेवा, संस्कार और संगठन का जीवंत संकल्प
“जब राष्ट्र सर्वोपरि होता है, तब व्यक्ति स्वयं साधन बन जाता है।”
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ केवल एक संगठन नहीं,
बल्कि राष्ट्र निर्माण की सतत साधना है।
सन् 1925 में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा स्थापित
RSS का उद्देश्य स्पष्ट है —
सशक्त, संगठित, संस्कारवान और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण।
संघ का प्रत्येक स्वयंसेवक
✔ निस्वार्थ सेवा
✔ कठोर अनुशासन
✔ राष्ट्रभक्ति
✔ सामाजिक समरसता
✔ सांस्कृतिक चेतना
को अपने जीवन का मूल मंत्र बनाता है।
🧡 शाखा – संघ की आत्मा
शाखा केवल शारीरिक अभ्यास नहीं,
बल्कि चरित्र निर्माण, नेतृत्व विकास और राष्ट्रचिंतन की प्रयोगशाला है।
यहाँ स्वयंसेवक जाति, भाषा, क्षेत्र से ऊपर उठकर
“भारत माता के पुत्र” बनते हैं।
🔥 आपदा में संघ सबसे आगे
चाहे बाढ़ हो, भूकंप, कोरोना महामारी या कोई भी राष्ट्रीय संकट —
RSS के स्वयंसेवक
सरकार की प्रतीक्षा किए बिना
सेवा, राहत और पुनर्निर्माण में सबसे पहले खड़े दिखाई देते हैं।
🇮🇳 राष्ट्रहित में सतत योगदान
शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, ग्रामीण विकास, स्वदेशी,
सीमा जागरण, सामाजिक समरसता —
संघ का कार्य जीवन के हर क्षेत्र में
मौन लेकिन प्रभावी रूप से चलता रहता है।
🚩 संघ का संदेश स्पष्ट है
व्यक्ति से समाज, समाज से राष्ट्र —
और राष्ट्र से विश्व कल्याण।
आज जब भारत विश्व मंच पर
आत्मविश्वास और सांस्कृतिक गौरव के साथ आगे बढ़ रहा है,
उसके पीछे दशकों की संघ तपस्या और स्वयंसेवकों का त्याग है।
🙏 गर्व है कि हम ऐसे संगठन से जुड़े हैं
जो सत्ता नहीं,
संस्कार और सेवा को अपना पथ मानता है।
🚩 जय भारत माता
🚩 वंदे मातरम्
🚩 राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

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