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भारत की पहली महिला डॉक्टर, जिन्होंने रूढ़ियों की जंजीरें तोड़कर विदेश में मेडिसिन की पढ़ाई की। उनका संघर्ष हर भारतीय नारी के लिए प्रेरणा है।
19वीं सदी का वह दौर जब महिलाओं का घर से निकलना भी मुश्किल था, तब एक महिला ने 'सात समंदर पार' जाकर डॉक्टर बनने की ठानी। वह थीं—आनंदीबाई जोशी। मात्र 9 साल की उम्र में शादी और 14 साल की उम्र में अपने नवजात बच्चे को इलाज के अभाव में खो देने के दर्द ने उन्हें बदल दिया।
उन्होंने कसम खाई कि वे डॉक्टर बनेंगी ताकि किसी और माँ की गोद सूनी न हो। तमाम आलोचनाओं और खराब सेहत के बावजूद, उन्होंने 1886 में अमेरिका से MD की डिग्री हासिल की। आनंदीबाई जोशी सिर्फ एक डॉक्टर नहीं, बल्कि एक मिसाल हैं। नमन है उनके जज्बे को!
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