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आज के दौर में एक कहानी बार-बार सामने आती है—
कहा जाता है कि सिद्धार्थ मंडल नाम के एक युवा ने लड़कियों को रेप से बचाने के लिए सेंसर वाली चप्पल बनाई,
और अफ़सोस… किसी ने देश के इस बेटे को बधाई तक नहीं दी।
यह बात सुनकर दिल में गुस्सा भी आता है, दर्द भी।
क्योंकि हम सब चाहते हैं कि जो समाज के लिए कुछ अच्छा करे, उसे सम्मान मिले।
लेकिन सच्चाई यह है कि सम्मान भावनाओं से नहीं, प्रमाण से मिलता है।
कई बार सोशल मीडिया पर एक आइडिया को आविष्कार बना दिया जाता है।
जबकि असली आविष्कार वही होता है जो
पेटेंट हो,
परीक्षणों से गुज़रे,
और ज़मीन पर काम करके दिखाए।
इसका मतलब यह नहीं कि युवाओं के विचार बेकार हैं—
बल्कि इसका मतलब यह है कि
अच्छे इरादों को सही दिशा चाहिए।
लड़कियों की सुरक्षा:
सिर्फ एक चप्पल से नहीं आएगी
न ही किसी गैजेट से
सुरक्षा आएगी तब, जब:
अपराधी डरेगा
कानून तेज़ होगा
समाज की सोच बदलेगी
हमें न झूठी कहानियों पर तालियाँ बजानी चाहिए,
न ही सच्चे प्रयासों को नज़रअंदाज़ करना चाहिए।
जरूरत है सच, संवेदना और समझदारी—
तभी सही लोगों को सही सम्मान मिलेगा,
और देश वाक़ई सुरक्षित और मजबूत बनेगा। 🌸#deshkabeta
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