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जे श्रद्धा संबल रहित नहिं संतन्ह कर साथ।
तिन्ह कहुँ मानस अगम अति जिन्हहि न प्रिय रघुनाथ॥
जिनके पास श्रद्धारूपी राह खर्च नहीं है और संतों का साथ नहीं है और जिनको रघुनाथ प्रिय नहीं हैं, उनके लिए यह मानस अत्यंत ही अगम है।
जय सियाराम 🙏

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