उत्तर प्रदेश के मेरठ की पहचान बन चुके पारंपरिक गजक को अब दुनिया भर में आधिकारिक पहचान मिल गई है। करीब 121 साल पुराने इस कारोबार को जियोग्राफिक इंडिकेशन (GI) टैग प्रदान किया गया है।
यह उपलब्धि मेरठ के कारीगरों, व्यापारियों और पीढ़ियों से इस मिठास को संजोए रखने वालों के लिए ऐतिहासिक मानी जा रही है। मेरठ रेवड़ी गजक व्यापारी वेलफेयर एसोसिएशन के प्रयासों से यह सफलता मिली है।
GI टैग मिलने के बाद अब गजक सिर्फ एक मिठाई नहीं, बल्कि मेरठ की सांस्कृतिक विरासत के रूप में वैश्विक मंच पर दर्ज हो गई है। इससे न सिर्फ नकली उत्पादों पर रोक लगेगी, बल्कि स्थानीय कारीगरों और व्यापारियों की आय में भी बढ़ोतरी होगी। अनुमान है कि इस कारोबार से 10 हजार से अधिक लोगों की आजीविका सीधे तौर पर जुड़ी हुई है।