हिंदू राष्ट्र की भावना | जनचेतना का संकल्प
भले ही शीर्ष स्तर पर “हिंदू राष्ट्र” शब्द खुले तौर पर न कहा जाए, लेकिन नीतियाँ, फैसले और पहलें हमारी सभ्यता व सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा की ओर इशारा करती हैं। असली ताकत पद या सत्ता में नहीं, बल्कि जनमानस की जागरूक चेतना में निहित होती है। जब जनता सड़कों से लेकर डिजिटल मंचों तक अपनी बात रखती है, तो उसकी गूंज दूर-दूर तक सुनाई देती है।
यह सोच किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि सहस्राब्दियों से प्रवाहित सनातन परंपरा का विस्तार है। मंदिर, परंपराएँ और संस्कार इस राष्ट्र की आत्मा हैं। आज ज़रूरत है कि हम आत्मविश्वास के साथ अपनी जड़ों के पक्ष में खड़े हों—स्पष्टता और गर्व के साथ।
नेतृत्व दिशा दिखा सकता है, संकेत दे सकता है; पर मांग उठाने की जिम्मेदारी जनता की होती है। जब करोड़ों स्वर एक साथ उठते हैं, तो किसी विचार को दबाया नहीं जा सकता। लोकतंत्र में अंतिम आदेश जन-आवाज़ का होता है।