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*बरसाना धाम से, श्रीराधा रानी के आज के बहुत सुंदर दर्शन, तथा परम भागवत पद रत्नाकर ग्रंथ, पद संख्या 707 🌹जय जय श्रीराधे 🌹🙏🌹*
🌹जिसने अपने तन-मन-जीवन सौंप दिये प्रियको सानन्द।
जिसने सब अधिकार दे दिया इन्हें बरतनेका स्वच्छन्द॥
🌹 जिसको गले लगाकर प्रभुने किया समर्पण सब स्वीकार।
जिसको कहा—प्राण तुम मेरी, क्यों वह यों अब करे विचार ?
🌹 कैसे वह दुखिया माने, क्यों समझे वह अपनेको दीन।
जिनके तन-मन, वे समझेंगे, भोगेंगे दुख-दैन्य मलीन॥
🌹 रखें शरीर, न रखें भले ही, रखें निकट अति, रखें सुदूर।
रखते वे अपनेमें नित ही, रहते स्वयं सदा भरपूर॥
🌹 जायें कहीं, मिलें, न मिलें वे, करें सदा सब कुछ विपरीत।
झंकृत होंगे, बस, उनमें ही कर्कश-मधुर सभी संगीत॥

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