आज मकर संक्रांति के पावन पर्व पर, उत्तर-पश्चिम भारत के एकीकरणकर्ता और गुजरात के महान शासक 'अवंतीनाथ' सम्राट सिद्धराज जयसिंह सोलंकी जी के निर्वाण दिवस पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। 🙏🪔
इतिहास के पन्नों में विस्मृत एक महानायक:
अक्सर इतिहास में हम सिद्धराज जयसिंह जी को केवल गुजरात के राजा के रूप में देखते हैं, जो कि उनके व्यक्तित्व के साथ न्याय नहीं है। प्रतिहार साम्राज्य के पतन के बाद, यह सिद्धराज जयसिंह ही थे जिन्होंने उत्तर-पश्चिम भारत को पुनः एक सूत्र में पिरोया।
⚔️ अदम्य साहस और विजय:
मात्र 10 वर्ष की आयु में पाटन की गद्दी संभाली और अपनी तलवार के दम पर सौराष्ट्र, कच्छ, आबू, जालोर, नाडोल और लाट प्रदेशों को अपने अधीन किया।
मालवा विजय: मालवा के शासक उदयादित्य परमार को हराकर 'अवंतीनाथ' का विरुद धारण किया।
बर्बरीक वध: अपनी प्रजा की रक्षा के लिए दानव रूपी बर्बरीक को भीषण मल्ल युद्ध में परास्त कर उसका वध किया।
अजमेर संबंध: वीर शिरोमणि अर्णोराज चौहान (अजमेर) से युद्ध और बाद में संधि कर अपनी पुत्री कंचनदेवी का विवाह उनसे किया। इन्हीं के पुत्र सोमेश्वर चौहान हुए।
🛕 धर्म और संस्कृति के रक्षक:
सम्राट केवल योद्धा नहीं, बल्कि कला और धर्म के संरक्षक भी थे।
परम शिवभक्त होने के बाद भी जैन आचार्य हेमचंद्र का सम्मान किया।
अपने पूर्वज मूलराज सोलंकी के स्वप्न 'रुद्र महालय' का निर्माण पूर्ण कराया।
सहस्त्रलिंग जैसे विशाल जलाशय का निर्माण किया और सिद्धपुर नगर बसाया।
🔥 आत्मचिंतन और आह्वान:
इतने विशाल साम्राज्य के स्वामी होने के बाद भी आज समाज उन्हें भूल बैठा है। क्या हम तभी जागेंगे जब कोई और हमारे महापुरुषों पर अपना दावा (Claim) करेगा? जैसे मिहिर भोज प्रतिहार जी के समय हुआ था?
आज आवश्यकता है कि हम अपने वास्तविक इतिहास को जानें और घर-घर तक पहुँचाएं। आज के दिन सम्राट सिद्धराज जयसिंह सोलंकी जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करें और एक दीपक अवश्य जलाएं। 🪔
जय एकलिंग जी की! जय राजपूताना! 🚩
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