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यह कहानी मुंबई की उन व्यस्त सड़कों की है, जहाँ आधी रात को भी मानवता ज़िंदा दिखी। देर रात एक विदेशी महिला पर्यटक अनजान रास्तों में भटक गई थी। भाषा की परेशानी, सूनसान सड़क और अजनबी शहर ने उसे डरा दिया, और वह सड़क किनारे खड़े होकर रोने लगी। उसी समय Rapido की महिला बाइक राइडर सिंधु कुमारी ड्यूटी खत्म कर घर लौट रही थीं।
रोती महिला को देखकर सिंधु ने तुरंत बाइक रोकी। पहले उसे शांत किया, फिर भरोसा दिलाया कि वह सुरक्षित है। जब पता चला कि महिला को अपने होटल का रास्ता नहीं मिल रहा, तो सिंधु बिना हिचक उसे बाइक पर बैठाकर निकल पड़ीं।
मुंबई की सड़कों से होते हुए सिंधु ने महिला को सुरक्षित उसके होटल पहुँचाया। वहाँ डर की जगह राहत के आँसू थे। यह घटना न सिर्फ सिंधु की बहादुरी दिखाती है, बल्कि बताती है कि मुंबई में आज भी इंसानियत और सुरक्षा ज़िंदा है।

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