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आज सपरिवार उत्तराखंड के पावन लोकपर्व उत्तरायणी–घुघुती त्यार को पारंपरिक उल्लास और आत्मीयता के साथ मनाया।
इस अवसर पर माताजी ने स्नेहपूर्वक दोनों पुत्रों को घुघुती पकवान की माला पहनाकर आशीर्वाद दिया। बच्चों ने पूरे उत्साह और आनंद के साथ “काले कव्वा काले, घुघुती माला खाले” के बोल गुनगुनाते हुए इस लोकपर्व की भावना को आत्मसात किया।
यह क्षण केवल एक उत्सव भर नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही लोकआस्था, पारिवारिक संस्कारों और सांस्कृतिक निरंतरता का सजीव प्रतीक है जहां परंपरा, प्रेम और विरासत एक साथ जीवंत हो उठे।
Pushkar Singh Dhami

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